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टेली ऑपरेटर्स को बड़ी राहत, जुर्माना नियमों में बदलाव
सूत्रों के मुताबिक अंतर मंत्रालयी समिति टेलीकॉम आयोग की गुरुवार को हुई बैठक में अलग-अलग जुर्माना लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। मगर देशभर में मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) सेवा लागू करने पर फैसला नहीं हो पाया। अब अगली बैठक में इस पर विचार होगा। फिलहाल ग्राहक एक सर्किल में नंबर बदले बिना ऑपरेटर बदल सकते हैं। और एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाया जाएगा। इसके बाद छोटे मामले में उन पर एक करोड़, मध्यम दर्जे वाले में पांच करोड़ और बड़े मामलों में 20 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। गंभीर मामलों में 50 करोड़ रुपये का हर्जाना टेलीकॉम कंपनियों को देना होगा। सूत्रों के मुताबिक, आयोग के प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए संचार मंत्री कपिल सिब्बल के पास भेजा जाएगा। साथ ही आचार संहिता लागू होने के चलते इसे चुनाव आयोग को भी भेजा जाएगा ताकि इस फैसले को लागू करने में कोई अड़चन न आए। दूरसंचार नियामक ट्राई ने अप्रैल 2012 में जुर्माने की अलग-अलग श्रेणी बनाने का प्रस्ताव दिया था। उसने छोटे और बड़े मामले की दो श्रेणी बनाने का सुझाव दिया था। छोटे मामले में 25 लाख रुपये और बड़े में 10 करोड़ रुपये जुर्माने की ट्राई ने सिफारिश की थी। मगर टेलीकॉम आयोग ने अधिकतम जुर्माने की राशि को बरकरार रखते हुए पांच श्रेणियां बना दी।
दांव पर 2500 करोड़! ब्रांड आइपीएल को लग सकता है बड़ा झटका
इन कंपनियों के लगभग 2500 करोड़ रुपये सीधे तौर पर दांव पर हैं। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गुरुवार को इस मामले पर टिप्पणी आने के बाद दैनिक जागरण ने चेन्नई सुपर किंग (सीएसके) और राजस्थान रॉयल्स (आरआर) को प्रायोजित करने वाली प्रमुख कंपनियों से बात की। बेहद चिंतित होने के बावजूद इनके प्रतिनिधि फिलहाल कुछ बोलने को तैयार नहीं है। सीएसके के एक प्रमुख प्रायोजक एयरसेल, सीएसके और आरआर की टीमों के एक अन्य प्रमुख प्रायोजक पेप्सीको के अधिकारियों ने बताया कि वे सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद ही आगे की रणनीति बनाएंगे।आरआर के प्रमुख प्रायोजक अल्ट्राटेक सीमेंट के एक अधिकारी ने बताया कि आइपीएल-7 में उन्होंने प्रायोजन का फैसला नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश को देखकर ही कंपनी आगे का फैसला करेगी। इनके अलावा गल्फ ऑयल, रीबॉक, उषा, निशान मोटर्स, किंगफिशर, टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज, गार्नियर जैसी कंपनियों की नजर भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर होगी।
कितना बड़ा है ब्रांड आइपीएल
आइपीएल की ब्रांड वैल्यू के बारे में हाल ही में दो रिपोर्ट आई हैं। केपीएमजी की रिपोर्ट कहती है कि आइपीएल-6 से 840 करोड़ रुपये का कुल राजस्व प्राप्त हुआ था, लेकिन मैदान से बाहर की कमाई इससे कई गुना ज्यादा है। ऐसे में शुक्रवार का फैसला ब्रांड आइपीएल को अभी तक का सबसे बड़ा धक्का दे सकता है।
आइपीएल पर अमेरिकन अप्रेजल एसोसिएट्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक सीएसके फ्रेंचाइजी आइपीएल का सबसे बड़ा ब्रांड बन गई है। सीएसके को 7.2 करोड़ डॉलर का ब्रांड माना गया था। अगर इसे आइपीएल से बाहर रखने का फैसला होता है तो इससे न सिर्फ सीएसके का ब्रांड वैल्यू काफी कम हो जाएगा, बल्कि इससे जुड़ी कंपनियां को भी काफी नुकसान उठाना पड़ेगा।
इस रिपोर्ट ने फिलहाल आइपीएल टीमों की ब्रांड की कीमत 40 करोड़ डॉलर (लगभग 2400 करोड़ रुपये) लगाई थी, लेकिन यह भी कहा था कि इसे कंपनी की पूरी कीमत नहीं समझा जाना चाहिए क्योंकि इससे कई गुना ज्यादा कमाई आइपीएल फ्रेंचाइजी अन्य तरीकों से करती हैं।
सेबी ने मोबाइल और इंटरनेट को बनाया हथियार
पिछले साल दिसंबर में सेबी ने मीडिया के जरिये निवेशक शिकायत निवारण तंत्र को लेकर जागरूकता अभियान शुरू किया था। सूत्रों के मुताबिक, सेबी यह अभियान आगामी वित्त वर्ष 2014-15 में भी जारी रखेगा। इसके तहत निवेशकों को शिकायत निवारण तंत्र, सामूहिक निवेश योजनाओं (सीआइएस) की जानकारी दी जा रही है। साथ ही म्युचुअल फंडों के जरिये प्रतिभूतियों में निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है। सेबी ने अब अपने अभियानों में नए साधनों के इस्तेमाल की योजना बनाई है। नियामक के मुताबिक निवेशक शिक्षा एवं जागरुकता अभियान से निवेशक आधार बढ़ाने के साथ पूंजी बाजार के विस्तार में भी मदद मिलेगी। नियामक ने देश भर के 13 प्रमुख भाषाओं के निवेशकों तक अपने संदेश पहुंचाने के लिए उपयुक्त माध्यमों के चुनाव की तैयारी है।
बनाएगा पेंशन फंड
सेबी अपने कर्मचारियों के लंबी अवधि के हितों को ध्यान में रखते हुए पेंशन फंड स्थापित करने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है। सेबी की रेशनलाइजेशन ऑफ फाइनेंशियल रिसोर्सेज समिति ने यह फंड स्थापित करने के प्रस्ताव का समर्थन किया है।समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि फंड की कार्यप्रणाली और संरचना संबंधी सभी मसलों पर विचार के लिए एक अलग समिति गठित की जाए। सेबी कुशल कर्मचारियों को नियामक में बनाए रखने और नए कर्मचारियों को आकर्षित करने के प्रयासों में जुटा है।
गूगल पर एक करोड़ का जुर्माना
कंपनी मामलों के मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि सीसीआइ के जांच महानिदेशक ने कंपनी से जानकारी और दस्तावेज मांगे थे। इसे मुहैया कराने में कंपनी असफल रही है। गूगल के खिलाफ मैट्रीमोनी डॉट कॉम और कंज्यूमर यूनिटी एंड ट्रस्ट सोसायटी ने सीसीआइ में शिकायत दर्ज कराई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि गूगल ऑनलाइन सर्च और विज्ञापन बाजार में अपनी प्रभावशाली स्थिति का दुरुपयोग कर रही है। यह मामला पिछले दो साल से आयोग के पास लंबित है।
गूगल के प्रवक्ता ने आयोग के इस कदम पर निराशा जताई है। हालांकि, उन्होंने कहा है कि अभी कंपनी को इस आदेश की प्रति नहीं मिली है। इसके बाद ही इसकी समीक्षा की जाएगी। प्रवक्ता ने भरोसा जताया कि कंपनी भारतीय कानूनों का पूरी तरह से पालन कर रही है। साथ ही वह आयोग को पूरी तरह से सहयोग करना जारी रखेगी।
सन्नी लियोन के मैनफोर्स कंडोम ऐड से बनी 3000 करोड़ की कंपनी!
सन्नी लियोन के मैनफोर्स कंडोम ऐड से बनी 3000 करोड़ की कंपनी!
मैनकाइंड के विज्ञापनों में उसके हर प्रोडक्ट्स की ब्रांडिंग हो रही है। सेक्स से पहले एडिक्शन डीयोडरेंट, अगर आप दुष्क्रिया से ग्रसित हैं तो मैनफोर्स टैबलेट, प्रेगसेंसी के जांच के लिए प्रेगान्यूज, बच्चा नहीं चाहते तो मैनफोर्स कंडोम और असुरक्षित यौन संबंध के बाद अनवांटिड 72। ये सारे प्रोडक्ट्स ऐसे हैं जिनके लिए डॉक्टर से राय या लिखित अनुमति की जरूर नहीं। एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित खबर के मुताबिक, अर्जुन जुनेजा जोकि कोई थैरेपिस्ट नहीं और न ही कोई कॉलम लिखते हैं वह मैनकाइंड फार्मा लिमिटेड के निदेशक (ऑपरेशन) हैं।
प्रकाशित खबर के अनुसार, जुनेजा ने कहा, 'सेक्स सेल्स'। वह इस बात को नहीं जानते थे जब तक उनकी कंपनी 3,000 करोड़ रुपये तक नहीं पहुंची थी। कंपनी ने सेक्स के इर्दगिर्द मार्केटिंग मॉडल को तैयार किया जिसे ओटीसी (ओवर द काउंटर) प्रोडक्ट्स कहा गया। इसे बिना कैमिस्ट के प्रीस्क्रिप्शन के खरीदा जा सकता है।
उन्होंने कहा, 'ये कभी भी ओटीसी की कहानी नहीं रही, ये फार्मा की कहानी है।' मैनकाइंड ने 1995 में अपनी शुरुआत की और पहले साल 3.8 करोड़ रुपये का कारोबार किया। लेकिन सिर्फ छह साल में कंपनी का कारोबार 2,000 करोड़ रुपये पहुंच गया और अब यह आंकड़ा 3,000 करोड़ रुपये के पार है। कंपनी का लक्ष्य साल 2017 तक 5,000 करोड़ रुपये का कारोबार करने का है।
साल 1995 में कंपनी के पास केवल एक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट था आज यह नंबर 20 तक पहुंच गया है जहां कंपनी के 85 फीसद प्रोडक्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग होती है। मार्केटिंग विशेषज्ञों का कहना है कि मैनकाइंड ने लोगों की सोच और बाजार की जरूरत को सही ढंग से समझा है और उसकी ब्रांडिंग भी की। सेक्स की कोर प्रक्रिया - कंडोम, टैबलेट, जेल्स, प्रेगसेंसी और अबॉर्शन किट हैं। इन सभी चीजों को कंपनी ने समेटा है। इनकी ब्रांडिंग भी तेजी के साथ की गई है। नतीजा आंकड़ों को देखकर समझा जा सकता है।
सेंसेक्स व निफ्टी ने बनाए नए रिकॉर्ड
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी सत्र के दौरान 6673.95 अंक की नई ऊंचाई देख आया। इस दिन यह 40.35 अंक की बढ़त के साथ 6641.75 के उच्चतम स्तर पर बंद हुआ। बीते दिन इसने पहली बार 6600 का आंकड़ा पार किया था। शेयर बाजार में रोज रिकॉर्ड बनाने का सिलसिला सोमवार से शुरू हुआ। बुधवार को सेंसेक्स ने 22172.10 अंक का उच्चतम स्तर छुआ था।
भारतीय बाजार में डॉलर उड़ेलने में जुटे विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआइआइ) ने बुधवार को 1004.52 रुपये के शेयर खरीदे।
इससे शेयर बाजार में तेजी का माहौल बना हुआ है। कयास तो नई सरकार बनने के बाद सेंसेक्स के 25 हजार तक जाने के लगाए जाने लगे हैं। गुरुवार को मार्च के वायदा सौदों के निपटान का दिन था। सौदे निपटाने के लिए की गई शॉर्ट कवरिंग ने भी ताजा तेजी में योगदान किया।
बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक मजबूती के साथ 22116.23 अंक पर खुला। कारोबार के दौरान यह नीचे में 22094.29 अंक तक भी गया। हेल्थकेयर, आइटी और मेटल को छोड़ इस दिन बीएसई में अन्य सभी सूचकांक बढ़त पर बंद हुए। पीएसयू, कंज्यूमर ड्यूरेबल और रीयल एस्टेट के शेयरों को लिवाली का ज्यादा लाभ मिला। सेंसेक्स की 30 कंपनियों में 20 के शेयर चढ़े और नौ गिरे, जबकि एक्सिस बैंक यथावत बंद हुआ।
